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भारतीयों की यही राय-‘Patni को हमेशा मानना चाहिए अपने Pati का कहना’

देश कितना भी बदल गया हो लेकिन लोगों की सोच आज भी वहीं की वहीं है। Pati-Patni के रिश्तों में कुछ चीज़ों को बदलने को कोई तैयार ही नहीं है। ज़्यादातर भारतीय इस बात से पूरी तरह या काफी हद तक सहमत हैं कि Patni को हमेशा ही अपने पति का कहना मानना चाहिए। एक अमेरिकी थिंक टैंक के एक हालिया अध्ययन में यह कहा गया है।

प्यू रिसर्च सेंटर की यह नई रिपोर्ट बुधवार(2 मार्च) को जारी की गई, जिसमें इस पर गौर किया गया है कि किस तरह से भारतीय घर और समाज में लैंगिक भूमिकाओं को कहीं अधिक सामान्य रूप से देखते हैं। रिपोर्ट 29,999 भारतीय वयस्कों के बीच 2019 के अंत से लेकर 2020 की शुरुआत तक किए गए अध्ययन पर आधारित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वयस्कों ने कहा कि महिलाओं को पुरूषों के समान अधिकार होना जरूरी है। हर 10 में आठ लोगों ने कहा कि यह बहुत जरूरी है। हालांकि, कुछ ऐसी परिस्थितियों में भारतीयों को लगता है कि पुरुषों को वरीयता मिलनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि करीब 80 प्रतिशत इस विचार से सहमत हैं जब कुछ ही नौकरियां है तब पुरूषों को महिलाओं की तुलना में नौकरी करने का अधिक अधिकार है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 10 में 9 भारतीय (87 प्रतिशत) पूरी तरह या काफी हद तक इस बात से सहमत हैं कि Patni को हमेशा ही अपने Pati का कहना मानना चाहिए। हर परिस्थिति में Patni को Pati का कहना मानना चाहिए, इस विचार से ज्यादातर भारतीय महिलाओं ने सहमति जताई। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जैसी नेताओं का जिक्र करते हुए इसमें कहा गया है कि भारतीयों ने राजनेता के तौर पर महिलाओं को व्यापक स्तर पर स्वीकार किया है।

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