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Jyotiraditya Scindia की पुरानी यादें होंगी ताज़ा,Delhi में मिलेगा मनपसंद बंगला

यादें इंसान के लिए हमेशा ख़ास होती हैं, बचपन की अच्छी यादें कभी भी याद आती हैं तो दिल ख़ुश हो ही जाता है। इंसान भले ही कितना भी बड़ा ओहदा हासिल कर ले, लेकिन कुछ ख्वाहिशें हमेशा बनी रहती हैं। कुछ ऐसा ही Jyotiraditya Scindia के साथ भी है। BJP में शामिल होने के बाद Jyotiraditya Scindia राज्यसभा सदस्य बने। केंद्र में मंत्रीपद भी हासिल कर लिया लेकिन उनकी एक चाहत अभी तक अधूरी रही है। यह चाहत है दिल्ली के लुटियंस जोन का वह बंगला, जिसमें महाराज का बचपन बीता है। 2019 में हार के बाद उनसे यह बंगला छिन गया था, जो कभी उनके पिता को अलॉट हुआ था। लेकिन अब केंद्रीय मंत्री निशंक द्वारा बंगला खाली करने के बाद उम्मीद है कि सिंधिया जल्द ही इसमें फिर से एंट्री करेंगे।

यह बंगला टाइप-8 श्रेणी है। बता दें कि लुटियंस जोन में बंगलों को टाइप-1 से लेकर टाइप-8 तक में डिवाइड किया गया है। टाइप-8 बंगला करीब 3 एकड़ में फैला होता है। इसमें कुछ आठ कमरे, स्टाफ क्वॉर्टर और ऑफिस के साथ-साथ लॉन और पार्किंग एरिया भी रहती है। साथ ही सभी अल्ट्रामॉडर्न फैसिलिटीज से यह बंगला लैस रहता है।

27, सफदरजंग रोड पर स्थित यह बंगला Jyotiraditya Scindia के दिल के बेहद करीब है। इस बंगले में सिंधिया ने अपना बचपन बिताया है। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने राजनीती की एबीसीडी भी यहीं से सीखी थी। असल में साल 1980 में यह बंगला Jyotiraditya Scindia के पिता माधवराव सिंधिया को आवंटित हुआ था। उसके बाद से इसमें सिंधिया परिवार ही रहता आ रहा था। माधवराव सिंधिया की मौत के बाद उनकी अंतिम यात्रा भी इसी बंगले से निकली थी। जब तक सिंधिया खुद इस बंगले में रहे थे तब तक पिता की नेमप्लेट भी नहीं हटने दी थी। लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मात खाने के बाद Jyotiraditya Scindia के हाथ से यह बंगला छिन गया था।

Jyotiraditya Scindia के इस बंगले से हटने के बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को यह बंगला आवंटित हुआ था। बताया जाता है कि बीच में कई बार Jyotiraditya Scindia ने इस बंगले के लिए जोर लगाया था। मध्य प्रदेश में जब 2018 में कांग्रेस सरकार बनी थी तो सिंधिया की उम्मीद कि मध्य प्रदेश के कोटे से उन्हें यह बंगला फिर से हासिल हो जाएगा। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। बाद में समीकरण बदले और Jyotiraditya Scindia ने भाजपा का रुख कर लिया। भाजपा ने जब उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया तो उन्होंने इसी बंगले की डिमांड की थी। लेकिन तब निशंक इसे खाली करने से मना कर रहे थे। अब जबकि यह बंगला खाली हो गया है, उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही महाराज की मुराद पूरी होगी।

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