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अस्पताल में डॉक्टर न मिले तो ख़ैर नहीं : CM Yogi

मरीज़ को वक़्त पर इलाज न मिले तो सब कुछ बेकार लगता है। पैसा देने के बाद भी अगर किसी को सही इलाज न मिले किसी का भी मूड ख़राब होना लाज़मी है। Yogi सरकार का अपने दूसरे कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर ख़ास फोकस है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से लेकर जिला स्तरीय अस्पतालों के हालात सुधारने की कवायद शुरू की गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी मंडलीय अपर निदेशकों, सीएमओ और सीएमएस को निर्देश जारी किए गए हैं। अब इनकी निगरानी प्रदेश स्तर से करने की तैयारी है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अब पूरे समय अस्पतालों में मौजूद रहना ही होगा। जल्द इसे लेकर औचक निरीक्षणों का सिलसिला भी शुरू होगा।

CM Yogi Adityanath विधानसभा चुनाव के दौरान भी लगातार अस्पतालों के दौरे करते रहे। यह सिलसिला अब भी चल रहा है। इधर, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भी अस्पतालों के निरीक्षण और शिकायतों पर जांच और कार्यवाही का सिलसिला शुरू कर दिया है। सर्वाधिक ज़ोर डॉक्टरों और स्टाफ के समय से अस्पताल पहुंचने और पूरे समय उपलब्ध रहने पर है। ताकि मरीज़ों को असुविधा न हो।

एडी, सीएमओ और सीएमएस को इसकी नियमित निगरानी रखने को कहा गया है। इस पर मुख्यालय स्तर से भी नज़र रखी जाएगी। यही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारियों को वहीं बने आवासों में ही रहने को कहा गया है। डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि तमाम गृह चिकित्सकों के सीएचसी स्थित आवासों में न रुकने का व्यवहारिक पहलू भी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वेदव्रत सिंह ने बताया, सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा रहा है। डॉक्टरों और स्टाफ के समय से अस्पतालों में मौजूद रहने और इसकी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यालय से भी इस पर नज़र रखी जाएगी।

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