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मायूस हो रहे हैं नौजवान, Job की उम्मीद छोड़ चुके हैं आधे भारतीय

पढ़ाई पूरी करने के बाद कोई भी नौजवान Job की ख़्वाहिश करने लगता है लेकिन जब Job नहीं मिलती है तो सारे सपने चकनाचूर हो जाते हैं। हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें दावा किया गया कि आधी से ज़्यादा कामकाजी भारतीय आबादी ने काम की उम्मीद छोड़ दी है। इसको लेकर अब भारत सरकार ने प्रतिक्रिया दी है।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार(26 अप्रैल) को कहा कि यह अनुमान लगाना कि कामकाजी उम्र की आधी आबादी ने काम की उम्मीद खो दी है, “तथ्यात्मक रूप से गलत” है। मंत्रालय ने कहा कि देश में श्रम बल और कार्यबल 2017-18 से 2019-20 के दौरान बढ़े हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने कहा कि महिला श्रम बल में भी वृद्धि हुई है। साथ ही महिला श्रमिक जनसंख्या अनुपात, वर्ष 2017-18 से 2019-20 के दौरान पुरुष श्रम बल और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में वृद्धि की तुलना में अधिक है।

मोदी सरकार की ओर यह स्पष्टीकर ऐसे समय में आया है जब ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (सीएमआईई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2017 से 2022 के बीच, कुल श्रम भागीदारी दर 46 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत हो गई, लगभग 2.1 करोड़ श्रमिकों ने काम छोड़ा और केवल 9 प्रतिशत पात्र आबादी को रोजगार मिला।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में अभी 90 करोड़ लोग Job के पात्र हैं जिनमें से 45 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अब काम की तलाश भी छोड़ दी है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लाखों निराश भारतीयों, विशेषकर महिलाओं ने पिछले पांच वर्षों में कम अवसरों के चलते नौकरियों की तलाश करना बंद कर दिया है और श्रम बल को पूरी तरह से छोड़ रहे हैं। इस रिपोर्ट पर मंत्रालय ने आगे कहा कि रोजगार भारत सरकार की प्राथमिक चिंता है और देश में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए मंत्रालयों/विभागों द्वारा विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।

मंत्रालय ने विज्ञप्ति में कहा, “यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूरी कामकाजी उम्र की आबादी काम नहीं कर रही है या काम की तलाश नहीं कर रही है। कामकाजी उम्र की आबादी का एक बड़ा हिस्सा या तो शिक्षा (माध्यमिक / उच्च / तकनीकी शिक्षा) का पीछा कर रहा है या स्वयं के उपभोग के लिए माल का उत्पादन, अवैतनिक घरेलू गतिविधियां या घर के सदस्यों के लिए देखभाल करने वाली सेवाएं, स्वयंसेवा, प्रशिक्षण आदि जैसी अवैतनिक गतिविधियों में लगा हुआ है।”

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