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Monday, October 25, 2021

दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास बम ब्लास्ट के बाद, इजराइल ने मोसाद को लगाया काम पर, जानें इसकी सफलता की कहानी

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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली:  एक तरफ किसान आंदोलन अपने चरम पर है, तो वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार शाम 5 बजकर 5 मिनट पर इजरायली दूतावास से करीब 150 मीटर दूर बम धमाके से सनसनी फैल गई। आपको बता दें कि इस ब्लास्ट में सीसीटीवी फुटेज भी मिला है। जिसमें दो संदिग्ध साफ दिखाई दे रहे हैं। जबकि दूसरी ओर पुलिस को चिठ्टी मिली जो ब्लास्ट की जगह पर पड़ी थी। आपको बता दें कि इस चिट्टी ने सबको सतर्क रहने की सूचना दे दी है। क्या आप जानते हैं, इस चिठ्ठी में क्या लिखा है? आप नहीं जानते तो हम आपको बताते हैं। इस चिठ्ठी में लिखा है कि यह एक ट्रेलर है। खास बात यह है कि यह चिठ्ठी इजरायली राजदूत के नाम से लिखी गई है।

इजराइली राजदूत के नाम से लिखी चिठ्ठी मिलने के बाद भारत और ज्यादा सतर्क हो गया है, जबकि इजराइल ने अपने सबसे बड़े वजीर यानि मोसाद को इसकी जॉच में लगा दिया है। अब आप सोच रहे होंगे कि मोसाक भारत में इसकी जॉच क्यों करेगी? तो आज हम आपको मोसाद के सफलता की कहानी बताते हैं।

मोसाद इजराइल की खुफिया जॉच एजेंसी है, जिसके तकनीक और सोच से दुनियां सोचने पर मजबूर हो जाती है। मोसाद की स्थापना 13 दिसंबर सन 1949 को इजराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन-गूरियन की सलाह पर की गई थी। तत्कालीन प्रधाममंत्री की यह सोच थी कि एक ऐसी केंद्रीय इकाई बनाई जाए जो मौजूदा सुरक्षा सेवाओं- सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश के राजनीति विभाग के साथ तालमेल और सहयोग को बढ़ाने का कार्य करे। साल 1951 में इसे प्रधानमंत्री के कार्यालय का हिस्सा बनाया गया इसके प्रति प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय की गई।

अब हम आपको मोसाद के वो बड़े ऑपरेशन बताते हैं, जिससे दुनियां इस खुफिया एजेंसी से खौफ खाती है।

खुदा का कहर: साल 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में इजराइल ओलंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों की उनके होटल में हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप दो आतंकी संगठन पर लगा था। इस घटना ने इजराइली सरकार को झकझोर कर रख दिय़ा। जिसके बाद इजराइली सरकार ने सबसे बड़े वजीर मोसाद को लगाया। एचेंसी ने 11 लोगो को हिट लिस्ट में डाला और लग गई काम पर।  इस ऑपरेशन मोसाद जिस तरह से जुटी मोनों किसी फिल्म की शूटिंग हो रही है। एजेंसी ने फोन, बम, नकली पासपोर्ट, उड़ती हुई कारें, जहर की सुई सब का इस्तेमाल किया। मोसाद एजेंटों ने कई देशों का प्रोटोकॉल तोड़ा और अपराधियों को चुन-चुन कर मारा। आपको बता दें कि इसके लिए एजेंसी टारगेट परिवार को एक बुके भेजते थे। जिसपर लिखा होता था “ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।“  ये ऑपरेशन बीस साल चला था।

महमूद अल मबूह की हत्या: साल 1989 में महमूद अल मबूह पर दो इजराइली सैनिकों को मारने का आरोप लगा। जिसके बाद इजराइल ने अपने वजीर को लगा दिया काम पर, मोसाद ने 21 साल बाद 19 जनवरी 2010 को दुबई के होटल अल बुस्तान रोताना में महमूद अल मबूह को मारकर अपना ऑपरेशन सफल किया। महमूद हमास के लिए हथियार की खरीद-बिक्री किया करता था। मोसाद ने मसूद के पैरों में सक्सिनीकोलीन का इंजेक्शन लगा दिया था जिससे वह पैरालाइज्ड हो गया था। इसके बाद उसके मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या की।

ऑपरेशन थंडरबोल्ट:  27 जून 1976 को जब इजरायली यात्रियों से भरी फ्रांस के एक यात्री विमान को अरब के आतंकियों ने अपहरण कर लिया। तब मोसाद ने अपनी ताकत और बुद्धिमानी के दम पर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश से अपने 94 नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया। युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पर मोसाद के ऑपरेशन को आज भी पूरी दुनिया में सबसे सफल हॉइजैकर्स मिशन माना जाता है। इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई जोनाथन नेतन्याहू भी शामिल हुए थे। हालांकि, उनकी ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी।

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