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अब क्या ‘आयोग’ यूपी को शिक्षित करेगा?

यूपी में शिक्षा विभाग के लिए नया साल कुछ नया और दिलचस्प होने वाला है। शिक्षा को और बेहतर बनाने को लेकर योगी सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है।

यूपी में शिक्षा विभाग के लिए नया साल कुछ नया और दिलचस्प होने वाला है। शिक्षा को और बेहतर बनाने को लेकर योगी सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। जिसके लिए सरकारी तंत्र भी इस काम में जुड़ गया है। बताते चले कि जल्द ही प्रदेश में शिक्षा आयोग का गठन किया जा सकता है, जिसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आदि के साथ बैठक भी की। जिसमें शिक्षा आयोग के अंतर्गत उच्च शिक्षा माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा को लेकर नए बदलाव और नए प्रारूप पर चर्चा की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक बहुत जल्द माध्यमिक शिक्षा उच्च शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। बता दें केंद्र की नई शिक्षा नीति के बाद से ही यूपी में शिक्षा आयोग के गठन को लेकर चर्चा शुरू हुई है। बता दें यह सभी कवायद शिक्षा प्रणाली को नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्मार्ट बनाने को लेकर किया जा रहा है। साथ ही शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार पर पूरी लगाम लगाने का प्रयास भी इसका एक अहम उद्देशय है।

मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षा आयोग के गठन में प्राथमिक स्कूल, जूनियर हाई स्कूल, माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा को शामिल किया गया है। जिसमें बकायदे निगरानी के लिए एक अध्यक्ष की तैनाती भी की जायेगी। मिला जुलाकर यह कहा जा सकता है कि एक परफेक्ट टीम का गठन किया जा रहा है। वहीं आयोग के गठन हो जाने के बाद शिक्षा विभाग आयोग के अधीन ही चलेगा। जिसको लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी किए हैं और एक बैठक भी की गई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि शिक्षा आयोग के गठन से शिक्षा व्यवस्था में कितना सुधार होगा। साथ ही ये भी देखना दिलचस्प होगा कि इस नई नीति और रणनीति से शिक्षा विभाग को कितना लाभ मिलेगा। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने के लिए UP सरकार लगातार प्रयासरत है,इसी क्रम में योगी सरकार का एक और यह कदम है।

आयोग के फायदे-

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ कई बार कह चुके हैं कि मदरसों से लेकर प्राइमरी स्कूल तक, इंटर कॉलेज से लेकर उच्च शिक्षा तक में गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। वहीं, शिक्षा आयोग बनने से अभी तक अलग-अलग विभाग द्वारा अलग-अलग निर्देश जारी होते हैं, वह बंद हो जाएंगे। आयोग की तरफ से जारी निर्देश बेसिक शिक्षा हो या माध्यमिक शिक्षा हो या फिर उच्च शिक्षा सभी पर लागू होगा। साथ ही इसमें खर्चों में भी कमी आएगी क्योंकि अलग-अलग विभाग अपने तरीके से काम करते हैं, टेंडर निकालते हैं और परचेसिंग करते हैं, जो आयोग के अधीन हो जाएगा।

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