Home जरूर पढ़े अंतरिक्ष में इतिहास रचने को तैयार इसरो, अमेरिका-रूस के लिए बड़ी चुनौती

अंतरिक्ष में इतिहास रचने को तैयार इसरो, अमेरिका-रूस के लिए बड़ी चुनौती

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नई दिल्‍ली। अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नए आयाम गढ़ता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो जल्‍द ही अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और ऊंची छंलाग लगाने वाला है। इसरो की यह पूर्ण रूप से व्यावसायिक उड़ान होगी। इसके साथ कोई भी भारतीय उपग्रह नहीं भेजा जाएगा। इसकी शुरुआत 16 सितंबर, 2018 को होगी, जब भारतीय राकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दो बिट्रिश उपग्रहों के साथ उड़ान भरेगा। इस कामयाबी के साथ ही भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिसके पास विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्‍थापित करने या भेजने की अपनी तकनीक मौजूद है। दरअसल इसरो ने अपनी स्‍थापना के बाद से ही देश को अंतिरक्ष के क्षेत्र में कई ऐसे मकाम दिए है, जिससे भारत की शक्ति का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। लेकिन ये कदम अब व्यावसायिक क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन अभी भी ऐसी कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनसे इसरो को पार पाना होगा।

बता दें कि इसरो ने 23 अप्रैल, 2007 को इसरो ने पहली बार व्‍यावसायिक उद्देश्‍य के लिए राकेट लांच किया था। लेकिन PSLV C-A ने इटली के खगोलिय उपग्रह AGILE को प्रक्षेपित किया था। इसके बाद 10 जुलाई 2015 को इसरो ने एक और उपलब्धि हासिल की जब उसने PSLV C-28 से पांच ब्रिट्रिश उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित किया, जिसका कुल वजन एक हजार 439 किलोग्राम था। इसरो अब तक 28 देशों के 237 विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपण कर चुका है। इसके साथ इसरो लगातार अपनी क्षमता और तकनीक को बढ़ाने में जुटा है, ताकि इसके जरिए ज्‍यादा से ज्‍यादा वाणिज्यिक उपग्रहों को लांच कर सके और उसे बड़ी मात्रा में कमाई हो सके।

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