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पनामा पेपर्स ने एक बार फिर खोली भारत के धनकुबेरों की पोल

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नई दिल्ली। पनामा पेपर्स ने एक बार फिर दूनिया भर के धनकुबेरों के काले कारनामों को खोल कर रख दिया है। दो साल बता दें कि पहले पनामा के लॉ फर्म मोस्साक फॉन्सेका के कुछ लीक पेपर्स में यह बात सामने आई थी कि भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख लोगों, कारोबारियों ने टैक्स हैवन कहे जाने वाले देशों में काला धन छुपाया है। अब फिर इस फर्म के कुछ ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जिनमें कई नए नाम सामने आए हैं और पुराने कारोबारियों पर टैक्स चोरी के आरोप कुछ पुख्ता हुए हैं।

अग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इंटरनेशनल कंसोर्श‍ियम ऑफ इन्वेस्ट‍िगेटिव जर्नलिस्ट ने 12 लाख से ज्यादा नए दस्तावेजों की जांच की है। इनमें से कम से कम 12,000 नए दस्तावेज भारतीयों से संबंधित हैं। वहीं दो साल पहले सामने आए मोस्साक फॉन्सेका के दस्तावेज में 500 भारतीयों का नाम था। वहीं जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने एक मल्टी एजेंसी ग्रुप बनाया है जो लिस्ट में शामिल 426 भारतीयों के बारे में जांच-पड़ताल कर रहा है। इस जांच के आधार पर करीब 1,000 करोड़ के काले धन का पता लगाया गया है।

वहीं लीक हुए पनामा पेपर्स में कई नए दिग्गज भारतीय कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। इनमें पीवीआर सिनेमा के मालिक अजय बिजली और उनके परिवार के सदस्य, हाइक मैसेन्जर के सीईओ और टेलीकॅाम दिग्गज सुनील मित्तल के बेटे कवीन मित्तल, एशियन पेंट्स के सीईओ अश्विन दानी के बेटे जलज दानी शामिल हैं। पनामा पेपर्स के पहले लीक में कई भारतीय कारोबारियों के टैक्स हैवन देशों में कंपनी बनाकर धन छुपाने की बात सामने आई थी, जिसका ज्यादातर कारोबारियों ने खंडन किया था। लेकिन अब नए लीक हुए दस्तावेजों से पुराने लगे आरोप पुख्ता हो गए है।

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